कुछ सच है, पर ज्यादा है झूठ ! - Kajal Chaurasia

Kuch Sach Jyada Hai Jhuth Kajal Chaurasia



नदिया सी भटकती रहती मै 
सागर सा मचल जाता है तू.. !!
तेरे बातों कि इस गहराई मे 
कुछ सच है, पर ज्यादा है झूठ.. !!

मौसम सी मस्तानी हूँ मै 
सरसों सा लहलाता है तू.. !!
तेरे फूलों कि ये जो खुशबू है
कुछ सच है, पर ज्यादा है झूठ..!! 

पेड़ो कि डाली जैसी मै 
तू तना वृक्ष का करकट सा.. !!
तेरे इन जंगल से घने इरादों मे 
कुछ सच है, पर ज्यादा है झूठ.. !!

- Kajal Chaurasia

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