चाँद अब तो नजर आ - Ghanshyamdas Vaishnav Bairagi

poem on moon by ghanshyamdas vaishnav bairagi

चाँद,
अब तो नजर आ।

अब छतरी हटा।।
क्यूँ छुप गया है
यह,
गिले शिकवे मिटा।
चाँद,
अब तो नजर आ।।
निकल चुका है बारिश
अब तो,
हम भी खड़े हैं
राहगीर बनकर।
सूरज की तपन में।।
अब तो,
चाँद नजर आ।
बारिश में भीगे,
ना भागे यहाँ से।
जहाँ स्नेह;
अपनापन है।
पर प्रेम तो वहीं हैं,
जहाँ चाँदनी सी नजर।।
मुस्कुराहट ऐसी,
ना चौदहवीं ना पूर्णिमा।
हमें तो कबूल है
अब इंतजार भी ऐसा।। 
दूज के चाँद का,
जहाँ न दाग है ना दगा।
हों एक पूर्णम् निषा का।।
जब चाँद,
फिर से निकले;
हों मुस्कुराहट हमेशा।।
बस,
छतरी हटा लो।।
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अब चाँद नजर आ जा।।

- घनश्यामदासवैष्णव बैरागी

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