मजदूर

poem on labour in lockdown majdoor

पैदल ही ......!
क्यों ...?
देश के विकास में जिसने अहम योगदान दिया ,
आज संकट के समय क्यों उसको इस तरह छोड़ दिया....?
क्या उसको हक नहीं कि उसको भी दो वक़्त की  रोटी के साथ  सुरक्षित आश्रय मिल 
जाता ?
वह भी देश की इस संकट की घड़ी में अपना कर्तव्य निभाता ।
अगर उस संक्रमण का एक कण भी उसके साथ चला गया ,
तो सोचो , उस गाँव को संक्रमण से कैसे  बचा पाएंगे  ?
जिन आसमान को छूती इमारतों को बनाकर वह गर्व से कहता था कि ये उसने बनाया 
है ....!
आज सब छिप गए उन बंद दरवाजों के पीछे ,
और वह बेघर ,चल पड़ा मीलों दूर, अपने घर को ,
पैदल ही .....!
क्यों …..?

परमजीत कौर
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