सरकार और जनता आज भी साथ-साथ

सरकार और जनता आज भी साथ-साथसरकार और जनता आज भी साथ-साथ

सरकार और जनता आज भी साथ-साथसरकार और जनता आज भी साथ-साथ


यूँ ही,
जज्बात दिखलाना?
मेरी क्या औकात है!
मैं तो लिखता हूँ बेखौफ।
जमाने के दर्द को कर भांप।।
यह बात,
महाबंदी की?
जहाँ जनता भी साथ है!
मैं तो ठेठ,
छत्तीसगढ़ीया।
यह मेरे जज्बात है।।
कहानी इस सुबह की।
मेरे गाँव सकरौद की बात है।।
छत्तीसगढ़ के,
बालोद जिला मुख्यालय से; 
42 किमी दूर गाँव सकरौद में। 
आज सुबह-सुबह मुझे, 
दो लोगों की आवाजें सुनाई दी। 
एक महिला ने, 
एक युवक से पूछा- 
आज काम में नहीं गया क्या? 
युवक बोला- 
क्या करोगे? 
आज भी काम बंद है? 
पता नहीं क्या होगा! 


इस बात से,
हम भी पूरी तरह;
इत्तेफाक रखते हैं।
आज पूरा देश,
"लाकडाउन" की स्थिति में है। 
लेकिन, 
सब एक-दूसरे के लिए; 
एक साथ खड़े हैं। 
कुछ सालों पहले, 
देश में 'नोटबंदी' के बाद; 
जब मेरा काम बंद हुआ था! 
और कई महिने, 
मैं आर्थिक परेशानी झेलता रहा? यह जो दर्द, 
मुझे व मेरे परिवार को हुआ! आज दोबारा, 
एक मजदूर की आवाज में; एहसास दिला गया? 
लेकिन, 
आज भी सभी देशवासी; सरकारों के साथ मिलकर, 
एक-दूसरे के लिए; 
एक साथ खड़े हैं! 
यह समय भी जंग का है। 
जिसे हम जीत ही जाएँगे! 
यह हमें भी पूरा विश्वास है? 
अपनी, 
समाज और 
सरकारों की मदद कर।। 
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- घनश्यामदासवैष्णव बैरागी


भिलाई (छत्तीसगढ़ )

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